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Thursday, August 14, 2014

''जानवरों की पहली पंचायत''

आज सुबह सुबह मेरे पास फोन आया की गाँव में सभी की भैस , गाय , बैल आदि पालतू जानवर लापता है, मुझे बड़ा गुस्सा आया मैं बोला तो फिर मैं किया करूँ , मैंने कोई जानवर पकड़ने का ठेका ले रखा है क्या  , उधर से आवाज आई ,, जनाब पूरी बात तो सुनो, मैंने कहा सुनाओ,वो बोला सभी जानवर रामलीला मैदान में एकत्रित हो रहे है,धीरे धीरे उनकी संख्या बढ़ रही है,अब मेरे दिल में भी उत्सुकता पैदा हो गयी मैंने कहा ठीक है मैं आता हूँ देखते है  कि क्या  माज़रा है,अब मेरे दिल में अलग अलग तरह के सवाल उठने लगे मैंने सोचा आजकल पंचायते बहुत हो रही , शायद जानवर भी अपने शोषण के खिलाफ आवाज उठाने के लिए लामबन्द हो रहे है ,जो भी हो चल कर देखते है ये सोचते हुए मैं रामलीला मैदान पहुचां , वहां देखा तो चारो और जानवर ही नज़र आ रहे थे , भेड़ , बकरी, भैस,गाय ,बैल, सभी यहाँ पर थे,इनमे से कुछ ने तो स्टेज पर भी कब्ज़ा जमा लिया था ये देख कर मैं मंद मंद मुस्काने लगा,शायद ये इनके छुटभैये  नेता है,जो पहले से ही स्टेज पर अपना कब्ज़ा जमा कर बैठे है,लेकिन कोई अब तक भाषण नही दे रहा था,फिर ध्यान से देखा तो माइक के सामने की जगह खाली थी तब दिमाग में आया की इनका बड़ा नेता अभी तक नही आया है,वो भी शायद हमारे नेताओ की तरह ही देर से आएगा ,तभी चारो एक खलबली सी मची तो मैं तुरन्त डर कर स्टेज के पीछे भाग गया , बड़ी हिम्मत जुटा  कर जब मैंने वहाँ से देखा तो मुझे एक बड़ा बुजुर्ग सांड फुफकारता हुआ (या यूँ कहो कि बुजुर्ग होने के कारण थोडा चलने से ही उसकी साँस फूल रही हो ) स्टेज की तरफ आ रहा था,सभी उसे आगे आने के लिए रास्ता दे रहे थे , तभी मेरे दिमाग में आया कि ये जो कहेगा वो मेरी समझ में तो आएगा नहीं, उसे तो केवल एक आदमी समझ सकता है,वो है अपना लट्ठ वाला ''ताऊ''
तो मैंने फटाफट ताऊ को फोन लगाया और सारी बात समझाई ताऊ ने मुझसे कहा फोन का स्पीकर खोल दो और स्टेज की और बढ़ चलो मैंने कहा ताऊ मरवाने का इरादा है क्या , मैं नहीं जाऊंगा , ताऊ ने कहा तुझे कुछ नहीं होगा जैसा कहता हूँ  वैसा कर , मरता क्या न करता ,जब ओखली  में सिर दे दिया तो अब मूसलो से क्या डर ,फिर मैं हिम्मत जुटा आगे बढ़ा  , ये लग रहा था न जाने किस पल शहीद हो जाऊंगा,, तभी फोन में से किसी जानवर की आवाज आने लगी जिसे सुनकर सारे जानवर मुझे रास्ता देने लगे,मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा ,और मन ही मन सोचने लगा ये ताऊ तो सो मर्जो की दवा है , फिर स्टेज पर पहुँच कर ताऊ को बता दिया की मैं स्टेज पर पहुँच गया हूँ, ,तो ताऊ ने कहा कि फोन को माइक के पास रख दो, मैंने फोन रख दिया और वही पास में ही खड़ा हो गया , फिर  फोन में से एक बार फिर जानवर की आवाज आई , तो इधर उस बुजुर्ग सांड  ने भी ऐसे ही आवाज निकाली ,मैं समझ गया एक दूसरे  को राम राम बोल रहे है,फिर क्या था बुजुर्ग सांड का भाषण शुरू हो गया , कभी फुफकारता तो कभी जोर से भाय भाय करता जब भाषण खत्म होने को आया तो एक बार फिर बुजुर्ग सांड ने जोर से भाय की आवाज निकाली  और फिर बाकी सारे जानवरों ने भी ऐसा ही किया, कुछ देर तक वो सब ऐसा ही करते रहे , मैं समझ गया की ये सब नारे लगा रहे है,और अंत में बुजुर्ग सांड ने फोन की और मुँह किया और जोर से फुफकारा तो हमारे ताऊ ने भी उसको उसी की आवाज में जवाब दिया , अब बुजुर्ग सांड वहा से चल दिया, ये शायद उसने ताऊ को अलविदा कहा है ,, मैंने तुरंत बहुत उत्सुकता में फोन उठा कर ताऊ से पूछा , ताऊ यहाँ हो क्या रहा था, ताऊ ने कहाँ आज ये सब बहुत खुश है,मैंने पूछा क्यों आज ऐसा किया मिल गया इन्हें ताऊ ने कहा इनके दोषियों को सजा जो मिल गयी है, मैं बोला  ताऊ साफ साफ बताओ ,ताऊ ने कहा अरे चारा घोटाले के दोषियों को, मैं बहुत जोर से हँसा मगर ये कह क्या रहे थे ये तो बताओ , ताऊ बोला ये कह रहे थे की इस फैसले के बाद अब कोई भी इनका चारा चुराने की हिम्मत नही करेगा , और CBI का भी शुक्रिया अदा किया , मैंने कहा चलो अच्छी बात है, जानवर भी अपने हक के लिए जागरूक हो गए है , मगर ये बताओ आखिर में ये सब फुफकार क्यों रहे थे, ताऊ हसे और फिर बोले ये कह रहे थे कि अब अगर किसी ने CBI को तोता कहा तो ये सब मिलकर उनकी ईंट से ईंट बजा देंगे,और सभी जानवर हड़ताल पर चले जायेंगे ,,,,,,,,


ताऊ ने  बुलाया और हम चले आयेे ,सादर

डॉ शौर्य मलिक 

1 comment:

  1. हा हा हा....बहुत ही लाजवाब व्यंग.

    #हिन्दी_ब्लॉगिंग दिवस पर आपके द्वारा किये सहयोग के लिये सादर आभार.
    रामराम

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